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काव्य धारा - धार छन्द, तिन्ना छंद, देवी छंद, कृष्ण या वपु छंद

धार छन्द  मापनी - 222 1 मगण लघु प्रति चरण चार वर्ण तुकान्त या समतुकांत  शब्दों की आवृत्ति नहीं।  1. आओ राम। मेरे धाम।। होते काम। तेरे नाम।। 2. मेरा देश। ऐसा वेश।। डोले पात। झूमे गात।। 3 जैसा भोग।  वैसा रोग।। देखो लोग।  बैठो योग।। 4 पूरा चाँद।  सालों बाद।। आयी रात। ले सौगात।। 5 साथी आज। दूँ आवाज।। गाओ गीत। मेरे मीत।। 6 माटी शान।  दूँगी जान।। है ये प्रीत।  बैरी भीत।। 7 आये सूर्य। देते अर्घ्य।। ऊर्जा दान। प्राणी जान।।                   डाॅ अनीता पंडा 'अन्वी' ********************************** तिन्ना छंद   मापनी - 222 2 मगण दीर्घ प्रति चरण चार वर्ण तुकान्त या समतुकांत  शब्दों की आवृत्ति नहीं।    1 मेरी राधा।  देखो बाधा।। लागे नैना।  ना है चैना।। 2 मैं हूँ तेरी।  तू है मेरी।। माता प्यारी। शोभा न्यारी।। 3 जागे रैना। मेरे नैना।। बोले बैना।  तू ही चैना।। 4 तीखे नैना। छीने चैना।। मीठे बैना।  सोचे रैना। 5 मैया आयी। वे हर्षायी।। बच्चे गाते। बोले माते।। डाॅ अनीता पं...